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Bihar News: वैशाली से दो युवकों को उठाए जाने पर पटना हाईकोर्ट सख्त, कर्नाटक सरकार और DGP को नोटिस

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | वैशाली से दो युवकों को बिना स्थानीय पुलिस सूचना और कथित तौर पर अदालती अनुमति के हिरासत में लिए जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार और डीजीपी को नोटिस जारी किया।

पटना, 7 सितंबर। बिहार के वैशाली जिले से दो युवकों को कथित तौर पर स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना हिरासत में लिए जाने के मामले ने अब पटना हाईकोर्ट का ध्यान खींचा है। मामला सामने आने के बाद अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए कर्नाटक सरकार के साथ वहां के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भी मामले में पक्षकार बनाया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह मामला आलोक उर्फ अंबानी और अमन कुमार से जुड़ा है। आरोप है कि 12 अगस्त 2026 को कर्नाटक पुलिस की एक टीम वैशाली पहुंची और दोनों युवकों को अपने साथ कर्नाटक ले गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस कार्रवाई से पहले स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी गई और संबंधित अदालत से आवश्यक ट्रांजिट रिमांड भी नहीं लिया गया।

मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की ओर से अधिवक्ता ने पुलिस की कार्रवाई और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं देने का आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कर्नाटक पुलिस की टीम बिहार के वैशाली जिले में पहुंची थी। आरोप के मुताबिक, दोनों युवकों को हिरासत में लेने से पहले स्थानीय थाना पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी गई।

अदालत के समक्ष यह भी दावा किया गया कि युवकों को बिहार से कर्नाटक ले जाने के लिए क्षेत्राधिकार वाली सक्षम अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से इसे गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़ी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के विपरीत बताया गया।

मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस की गिरफ्तारी और दूसरे राज्य से संबंधित कार्रवाई को लेकर तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी अदालत के सामने अधिकारियों के जवाब और रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

बिहार और कर्नाटक सरकार से मांगा विस्तृत हलफनामा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने केवल कर्नाटक पुलिस से जवाब मांगने के बजाय दोनों राज्यों के जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

अदालत ने बिहार और कर्नाटक सरकार से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि दोनों युवकों को किस आधार पर हिरासत में लिया गया था और उन्हें बिहार से बाहर ले जाने के दौरान कौन-कौन सी कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई गईं।

कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि आलोक उर्फ अंबानी और अमन कुमार इस समय कहां हैं। इसके अलावा यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनकी गिरफ्तारी अथवा हिरासत के बाद किसी सक्षम अदालत के समक्ष उन्हें पेश किया गया था या नहीं और यदि किया गया तो संबंधित न्यायिक प्रक्रिया क्या रही।

कर्नाटक के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस

पटना हाईकोर्ट ने कर्नाटक के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत के आदेश के अनुसार नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट के अलावा आधिकारिक ईमेल के माध्यम से भी भेजा जाएगा।

अदालत का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामला एक राज्य की पुलिस द्वारा दूसरे राज्य में जाकर की गई कार्रवाई से जुड़ा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय पुलिस को सूचना देने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने को लेकर कई स्तरों पर जवाबदेही तय होती है।

हाईकोर्ट यह जानना चाहता है कि युवकों को हिरासत में लेने की कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई और क्या दूसरे राज्य में पुलिस कार्रवाई के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ था।

16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई में बिहार और कर्नाटक सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे महत्वपूर्ण होंगे।

अदालत के सामने अधिकारियों के जवाब आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों युवकों को हिरासत में लेने के दौरान कौन-कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई थी। साथ ही यह भी सामने आएगा कि स्थानीय पुलिस को सूचना देने और ट्रांजिट रिमांड से संबंधित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

फिलहाल अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सरकारों और वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है। अब अगली सुनवाई पर अदालत के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज और आधिकारिक जवाब पर सभी की नजर रहेगी।

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कानून से ऊपर कोई नहीं

किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या हिरासत कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए। खासकर जब कार्रवाई किसी दूसरे राज्य में की जा रही हो, तब स्थानीय पुलिस और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े नियमों का पालन महत्वपूर्ण हो जाता है।

पटना हाईकोर्ट का मौजूदा रुख इसी व्यापक सवाल की ओर संकेत करता है कि पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही कितनी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को दूसरे राज्य से उठाकर ले जाया जाता है, तो उसके परिवार और स्थानीय प्रशासन के लिए भी यह जानना जरूरी है कि कार्रवाई किस आधार पर हुई और संबंधित व्यक्ति को किस न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे ले जाया गया।

हालांकि इस मामले में अभी आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है। कर्नाटक और बिहार सरकार के हलफनामे तथा उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल अदालत के समक्ष उठाए गए आरोपों और सरकारों से मांगे गए जवाब को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

अगली सुनवाई में यदि अदालत के सामने प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आती हैं, तो मामले की दिशा महत्वपूर्ण रूप से बदल सकती है। वहीं यदि अधिकारियों के रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था, तो अदालत उसी आधार पर आगे निर्णय लेगी।

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